Javed Akhtar

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@javed-akhtar

Javed Akhtar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Javed Akhtar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

क्यूँ मेरे साथ कोई और परेशान रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे

Javed Akhtar
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हमें जब से मोहब्बत हो गई है
ये दुनिया ख़ूबसूरत हो गई है

Javed Akhtar
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ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे
ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का

Javed Akhtar
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क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
कुछ न होगा तो तजरबा होगा

Javed Akhtar
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वो ज़माना गुज़र गया कब का
था जो दीवाना मर गया कब का

Javed Akhtar
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नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो
हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग

Javed Akhtar
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मुझे मायूस भी करती नहीं है
यही आदत तिरी अच्छी नहीं है

Javed Akhtar
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फिर ख़मोशी ने साज़ छेड़ा है
फिर ख़यालात ने ली अँगड़ाई

Javed Akhtar
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मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन
मिरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है

Javed Akhtar
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ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के
वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है

Javed Akhtar
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मैं भूल जाऊँ तुम्हें अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ

Javed Akhtar
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कल जहाँ दीवार थी है आज इक दर देखिए
क्या समाई थी भला दीवाने के सर देखिए

Javed Akhtar
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सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है

Javed Akhtar
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अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का

Javed Akhtar
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मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी

Javed Akhtar
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तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

Javed Akhtar
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तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे
अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है

Javed Akhtar
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याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
कल रस्ते में उस ने हम को पहचाना तो होगा

Javed Akhtar
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मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा
वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँ हारा

Javed Akhtar
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धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है
न पूरे शहर पर छाए तो कहना

Javed Akhtar
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