@dipendra-singh
Dipendra Singh 'Raaz' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dipendra Singh 'Raaz''s shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मैं उसे साथ तो रख लेता किताबों की तरह
पर वो हर साल बदलता है निसाबों की तरह
जब हुआ दिल तो वो आया न हुआ दिल तो नहीं
वो हक़ीक़त में भी आता है तो ख़्वाबों की तरह
वो इक गली जिसे छोड़ हुए मुझे बरसों
न जाने क्यों मेरे ख़्वाबों में रोज़ आती है
वो अपने ज़ेहन में रखती थी पहले मुझको फिर
वो मेरा नाम बनाती थी अपने हाथों पे
हमको तन्हाई मयस्सर हुई तो इल्म हुआ
ये सुकूँ वो है जो बाहों में नहीं मिलता है
इज़्ज़त-ओ-आबरू के डर से फिर इक वालिद ने
अपनी बेटी की मोहब्बत का गला घोंट दिया
इश्क़ में ख़ुद को मैं बर्बाद नहीं कर सकता
एक औरत के बुढ़ापे का सहारा हूँ मैं
सतह से तह तलक होना पड़ेगा गर्क ही तुमको
समंदर के किनारे पर कभी मोती नहीं मिलते
नज़र आईं न मुझको वो जब अपने घर के आगे
तो धीमी पड़ गई धड़कन मेरी फिर दर के आगे
तरस खाकर मेरी हालत पे वो रोती रही पर
क़दम अपने बढ़ा पाई न अपने डर के आगे
याद तन्हाई में आता है तुम्हारा कहना
दीप तुमको कभी तन्हा नहीं छोड़ूँगी मैं
जब से पंछी खो गए हैं
पेड़ गूँगे हो गए हैं
मौत जैसा कुछ नहीं है
थक चुके जो सो गए हैं
हँसते हुए चेहरों को कमल कौन कहेगा
जब हम ही न होंगे तो ग़ज़ल कौन कहेगा
ये फ़िक्र मुझे उससे बिछड़ने नहीं देगी
मैं हूँ न हमेशा उसे कल कौन कहेगा
अश्क, तन्हाई, ग़म-ए-हिज्र, उदासी, वहशत
ये सभी लफ़्ज़ निचोड़े तो जा के इश्क़ बना
छोड़ दी दर्द में भी तुमने शिकायत करनी
आख़िरश सीख ही ली तुमने मुहब्बत करनी