जब किया इज़हार तो हंँस कर मुझे कहने लगी
    प्यार से दो बात करना प्यार हो जाता है क्या

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    हिज्र का फर्ज़ निभाया है मैं ने शिद्दत से
    साल दो साल तलक मैं भी रहा हूँ तन्हा

    ख़्वाब तुमने जो दिखाए थे मुझे उल्फ़त में
    मैं जनाज़े के तले उनके दबा हूँ तन्हा

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    हिज्र में अब वो रात हुई है जिसमें मुझको ख़्वाबों में
    रेल की पटरी, चाकू, रस्सी, बहती नदियाँ दिखती हैं

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    दुखी रहने की आदत यूंँ बना ली है कि अब कोई
    ख़ुशी का ज़िक्र भी कर दे तो फिर तकलीफ़ होती है

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    आज फ़िर आया नहीं मैसज तुम्हारा
    आज फ़िर ग़ुस्सा निकाला आइने पर

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    करो हज़ार मेरे हक़ में बद-दुआ लेकिन
    मुझे वो याद न आए ये बद-दुआ न करो

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    मुहब्बत दूसरी बारी भी हो सकती है तुमसे पर
    यकीं वापस से अब तुम पर दोबारा हो नहीं सकता

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    उसने कहा के याद न आना मुझे कभी
    सो मैं दुआएंँ कर रहा हूंँ मौत की मेरे

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    मैंने तमाम उम्र बितानी थी तेरे संग
    मैंने तमाम उम्र गुज़ारी तेरे बिना

    Dipendra Singh 'Raaz'
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    सीने से लगा लो मुझे तुम इक दफ़ा आकर
    स्वेटर से मेरी जान ये सर्दी नहीं रुकती

    Dipendra Singh 'Raaz'
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