@ahmaddd
'Ahmad' amrohvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in 'Ahmad' amrohvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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हराम कह के मज़े को ख़राब करते हैं
ये पारसा मिरा पीना अज़ाब करते हैं
तुझे ख़बर नहीं ख़लवत में तुझको सोच के हम
कि रोज़ क्या अमल-ए-ना-सवाब करते हैं
रुख़-ए-निगाह-ए-आतिशा से कलाम कर के आ रहे हैं
हम उन निगाहों को सर-ए-रह सलाम कर के आ रहे हैं
किसी के रंज से उसको निकाल कर पहले
उसी के रंज में अब ख़ुद ही फस गया हूँ मैं
बड़ा कमीन हूँ दलदल में पैर ख़ुद रखकर
ये कह रहा हूँ कि धोखे से धस गया हूँ मैं
मैं ही कमबख़्त हूँ ज़िंदा हूँ बिछड़ के, वरना
मैने देखा है हर इक चीज़ को तन्हा कर के
कीं कोशिशें हज़ार उसे भूल जाऊँ मैं
वो भी मय-ए-कुहन है उतरती नहीं मगर
एक उम्र काट दी उसी के इंतेज़ार में
कमबख़्त शाम-ए-हिज्र गुज़रती नहीं मगर
मिरी मोहब्बत को अपने कमरे में बिस्तरों पे सजाने वाले
ये बद्दुआ है कि तुझको उसके बदन में लज़्जत नहीं मिलेगी
उसी के दम से है मुस्तमिर निज़ाम-ए-गर्दिश-ए-आसमाँ
क़रार-ओ-रंगत-ओ-रौनक-ए-जहान-ए-फानी है राबिया
दिल-ए-मरहूम में अब जान नहीं आएगी
ज़िंदगी हो के पशेमान नहीं आएगी
देख कर जिसको मोहब्बत का तुम्हें धोका हुआ
अब कभी लब पे वो मुस्कान नहीं आएगी
तुरफ़ा-ओ-चेहरा-ए-तरब थी तुम
जीने का इक फ़क़त सबब थी तुम
था मुलाज़िम ख़ुदा का इस ख़ातिर
दिल-ए-मज़दूर की कसब थी तुम