@abrar-kashif
Abrar Kashif shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abrar Kashif's shayari and don't forget to save your favorite ones.
Followers
396
Content
20
Likes
1496
सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देखकर घर से निकलते हैं
हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देखकर घर से निकलते हैं
दिया जला के सभी बाम-ओ-दर में रखते हैं
और एक हम हैं इसे रह-गुज़र में रखते हैं
समुंदरों को भी मालूम है हमारा मिज़ाज
कि हम तो पहला क़दम ही भँवर में रखते हैं
दर्द-ए-मुहब्बत दर्द-ए-जुदाई दोनों को इक साथ मिला
तू भी तन्हा मैं भी तन्हा आ इस बात पे हाथ मिला
तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता
मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
अपने दिल में बसाओगे हमको
और गले से लगाओगे हमको
हम नहीं इतने प्यार के क़ाबिल
तुम तो पागल बनाओगे हमको
अब के हम तर्क-ए-रसूमात करके देखते हैं
बीच वालों के बिना बात करके देखते हैं
इससे पहले कि कोई फ़ैसला तलवार करे
आख़िरी बार मुलाक़ात करके देखते हैं
मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है
मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैं
तेरे नगर के सुख़नवर ही और होते हैं
तुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्त
डुबोने वाले समंदर ही और होते हैं
घर की तक़सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं
फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं
बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर
हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं
दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या?
बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या
मुझसे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें
भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है
ये राह-ए-इश्क़ है इसमें क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है