@SanjayBhat
Sanjay Bhat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sanjay Bhat's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता
ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
हम तमन्नाओं के बहलावे में आ तो जाएँ लेकिन
शौक़ वो बाक़ी कहाँ वो हौसला लाएँ कहाँ से
और भी ग़म ज़ीस्त में हैं सिर्फ़ अपना ही नहीं
और सितम ये है कि हस्ती से रिहाई भी नहीं
ऐ रब तू कहीं तो बस्ता मंदिर में है तो मस्जिद में भी
ये माया है या जादू है कि तुझे भी सब्र-ओ-क़रार नहीं
वक़्त मिरे हिस्से की मिट्टी खींच गया
गर्द से और धुएँ से मुझ को सींच गया
मैं खिलता भी तो क्या खिलता आँगन में
वह ज़ालिम हस्ती भी मेरी भींच गया
ऐ रब तिरी तलाश से उकता गया हूँ मैं
चलते ही तेरी राह पे मुरझा गया हूँ मैं
थोड़ा तो खोल दे तू भी दिल का किवाड़ अब
हर बार ना-उमीद ही भेजा गया हूँ मैं
ग़ालिब के रंज-ओ-ग़म देख के माना हम उन से अच्छे
उन को पढ़ के समझे क्या है दिया उस सूरज के आगे
माँगता ही रहा कुछ मिला भी नहीं
साँस लेता रहा मैं जिया भी नहीं
बस में कुछ भी नहीं मेरे ऐ ज़िंदगी
मेरे हक़ में तो मेरी दुआ भी नहीं
बुझा चराग़ तोड़ना ज़रूरी तो नहीं
हवा के ज़ोर से बुझी है रौशनी मिरी
तू फिर से मुझ को लौ लगा के देख ले ज़रा
चमक उठेगी फिर ये शाम-ए-ज़िंदगी तिरी
किसी उम्मीद को यूँ पाल रक्खा है
कि लाचारी को कल पर टाल रक्खा है
हमें तो आज ही पाना है तुझ को दोस्त
तिरा कल के लिए रूमाल रक्खा है
तराश मुझ को कि कोई मिरा सिरा निकले
सिरा दिखे जो अगर कोई सिलसिला निकले
वो सिलसिला हो तिरी मेरी ज़िंदगानी का
अगर जो निकले तो हर लफ़्ज़ हर गिला निकले
कोई तमाम रात का जगा हुआ
किसी निगाह से कोई रिहा हुआ
नज़र ही लग गई उसे रक़ीब की
ज़माने भर से कोई बे-वफ़ा हुआ
पिघलती है ये क़तरा क़तरा रंग अपना बदलती है
तिरी गर्मी की जुंबिश से तमन्ना भी फिसलती है
जवानी ख़त्म हो जाती है नादानी में जल जल के
दिल-ए-नादाँ को बिल-आख़िर ये मिट्टी ही निगलती है
मंज़िलों की प्यास है ये ज़िंदगी
तेरी मेरी आस है ये ज़िंदगी
इस सफ़र में ख़ार भी हैं गुल के साथ
फिर भी कितनी ख़ास है ये ज़िंदगी