Safeer Ray

Safeer Ray

@Safeerrayy

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  • Ghazal
  • Nazm

रात मेरी बेवग़ी है
साक़ी प्याला तिश्नगी है

तू सँभल कर बात करना
बात अब लगने लगी है

क्यों ये मंजिल दूर लगती
राह पे क्या माँदगी है

रहबरी कैसी है जाने
जिसमें केवल तिफ़्लगी है

अब न मुझको होश है कुछ
जाने कैसी रफ़्तगी है

Safeer Ray

ऐसे अंदाज़ निराले हैं सनम के यारो
ख़ल्वतों में भी उजाले हैं सनम के यारो

सारी टकसाल झुकी है वफ़ा की सज्दे में
मैंने कुछ सिक्के उछाले हैं सनम के यारो

बिन छुए मय को जो मदहोश किए रखते हैं
वो निगाहों के ही प्याले हैं सनम के यारो

वो उमड़ के घटा जो बारिशों में ढलती है
उन को ज़ुल्फ़ों में सँभाले हैं सनम के यारो

बात कड़वी भी कहे चाशनी सी लगती है
होंठ दोनों ही रसाले हैं सनम के यारो

आँख दोनों लगे तलवार पलक बरछी है
भौंह दोनों लगे भाले हैं सनम के यारो

Safeer Ray

वो छज्जे से छत पर ऐसे उतरा है
पानी में जैसे चांद से पहले उतरा है

रात न जाने कितनी लम्बी गुज़रेगी
ख़्वाब मेरी गोदी से ऐसे उतरा है

ज्वार के मेरी बात अनोखी चारागर
इश्क़ चढ़ा है इसको कहते उतरा है

पाँव में उसके छाले हैं सुनता था मैं
तो फिर मेरे दश्त में कैसे उतरा है

लोग किनारे कश्ती लेकर पहुँच गए
और वो पागल बीच भॅंवर के उतरा है

Safeer Ray

दिल में पलता है यही अरमान दे दें
सर पटक के दर पे तेरे जान दे दें

हो यही आलम सुख़न-वर क्या लिखे फिर
हर्फ़ ही जब पागल-ओ-पहचान दे दें

ढाल मेरी पेन है तलवार स्याही
कर्ण के माफ़िक भी क्या ये दान दे दें

है अगर रब की रची हर एक शय तो
मिल के क्या काफ़िर सभी कुफ़्रान दे दें

बिक रही है आस्था अब हर गली में
दाम पर दर्शन सभी भगवान दे दें

क्यों भटक कर ये मोहब्बत ढूँढते हो
हमसे आ के मिल लो हम गुरफ़ान दे दें

नफ़रतों की चोट खाकर हो गुरेज़ाँ
जान पहलू में रहो मेहरान दे दें

इन दहकते लब से छू कर राख कर दो
इस हुनर का गर कहो भुगतान दे दें

इन फ़सीलों पर लहू के दाग़ कैसे
नाम में सब आशिक-ओ-मीरान दे दें

इश्क़ ज़ालिम है कि जैसे एक बूचड़
क्या तुम्हें इस बात की पहचान दे दें

मक़्तलों पे मर के लटका एक बकरा
और कसाई पूछता है रान दे दें

Safeer Ray

हम ही तुम से बड़ी उम्मीद लगा बैठे थे
बे-वजह ख़्वाब सुनहरे से बना बैठे थे

आग अक्सर उसी घर को भी जला देती है
रौशन-ए-दर को जो दीपक सा जला बैठे थे

शाम होते ही लटक जाती गुलों की लाशें
पेड़ जो इश्क़-बग़ीचे में लगा बैठे थे

हो गई एक ख़ता तन्हा बहुत हम रोए
जाने-अनजाने में हर ख़त को जला बैठे थे

शहर है जो ये बहानों का बना लगता है
और हम ख़ुद को ही वादों पे लुटा बैठे थे

मैं गिरह खोल उठा दिल की सभी गाँठों की
दरमियाँ जो भी थे वो रम्ज़ बता बैठे थे

Safeer Ray

दिल ही दिल में थी कसक जो यहाँ पे ले आए
रात लंबी थी शराबों के भी प्याले लाए

लुत्फ़ है ये कि अभी बारिशों के मौसम हैं
पैर चल कर मुझे मयख़ाने में हैं ले आए

फिर से कमअक़्ली में हमसे भी बड़ी भूल हुई
उनकी शादी में भी सेहरा की ग़ज़ल गा आए

हो सके झाँक लो टूटे हुए आईनों में
दिल शिकस्ता हो तो शायद कि सुकूँ भी पाए

रात नाबीना है कुछ देख नहीं सकती मगर
चाँद तुम बन के जो आओ तो नज़र आ जाए

Safeer Ray

कितना आसाँ हो जाए तुमसे बातें कहना
ज़बाँ सा आँखों को मिल जाए कोई इक गहना

शोर मयस्सर जिनको उनको क्या इल्म-ओ-हालात
कितना मुश्किल होता है तन्हा घर में रहना

सर्द हवाएँ पूछ रही ग़ुर्बत के अफ़्साने
गीली लकड़ी ठण्डा चूल्हा आँसू का बहना

ले के क़िस्मत मैं आया हूँ माटी की अपनी
जिस दीवार के साये में हूँ उसको है ढहना

Safeer Ray

सितारों से उलझता जा रहा हूँ
ख़यालों में भटकता जा रहा हूँ

तिरी आँखों का जादू बोलता है
मैं ख़ुद में ही सिमटता जा रहा हूँ

तअल्लुक़ का भरम टूटा है लेकिन
अभी तक सर पटकता जा रहा हूँ

गुज़रता वक़्त कुछ कहता नहीं है
मगर मैं सब समझता जा रहा हूँ

तिरी तंज़ीम में जलवा भी देखा
मगर फिर भी लुटाता जा रहा हूँ

तिरी हर बात में दुनिया नई थी
मैं हर लफ़्ज़ों को पढ़ता जा रहा हूँ

ग़म-ए-दुनिया से मैं वाक़िफ़ बहुत हूँ
मगर तुझ से उलझता जा रहा हूँ

तिरे पहलू में जन्नत भी नहीं थी
मगर फिर भी ठहरता जा रहा हूँ

मिरी बर्बादियों पर ख़ुश बहुत तू
मैं फिर भी मुस्कुराता जा रहा हूँ

तिरे लहजे में शोख़ी भी बहुत थी
मगर मैं दिल दुखाता जा रहा हूँ

मिरे अफ़्क़ार का मौसम है बदला
मैं बादल सा बरसता जा रहा हूँ

मुझे हर ज़ुल्म की आदत पड़ी है
तिरी दुनिया में रहता जा रहा हूँ

तआरुफ़ था कभी मैं भी बहारों
मगर बन ख़ाक उड़ता जा रहा हूँ

तिरी महफ़िल में बेगाना सा हूँ मैं
तिरे सज्दे से उठता जा रहा हूँ

मुझे हर मोड़ पर ठोकर मिली है
मगर मंज़िल भी पाता जा रहा हूँ

तिरी रहमत का ख़्वाबीदा था हरदम
मगर अब जागता सा जा रहा हूँ

तिरी ज़ुल्फ़ों में उलझे दिन गुज़ारे
मगर अब फिर सुलझता जा रहा हूँ

मैं वो बर्बादियों की दास्ताँ हूँ
जिसे हर वक़्त पढ़ता जा रहा हूँ

अजल के क़हक़हे गूँजे फ़ज़ा में
मैं आख़िर तक भी ज़िंदा जा रहा हूँ

Safeer Ray

फिर से मिलने को ये सौदा ही करें
वादा तो हो भले आधा ही करें

तुम हमें देख के पलटो न कभी
हम तुम्हें देख के रोया ही करें

इश्क़ में दर्द का चर्चा न हुआ
दिल के हालात इशारा ही करें

ख़्वाब महफ़ूज़ हैं आँखों में अभी
इनको ताबीर का सौदा ही करें

अब न पहलू में कोई बैठ सके
अपनी तन्हाई को अपना ही करें

अब तो रिश्तों का भरम भी न रहे
जो भी सच हो वही देखा ही करें

दिल में उलझी हुई गिरहें खोलें
या मोहब्बत को अधूरा ही करें

राह तकते हैं सदा रातों में
चाँद को अपना सहारा ही करें

आज फिर से कोई अफ़वाह उड़ी
चलो हम उस पे भरोसा ही करें

दुश्मनी की भी शराफ़त देखो
ग़म दिए और कहा हँसना ही करें

ख़त जो भेजा था मोहब्बत में कभी
फिर वही बात तमाशा ही करें

Safeer Ray

मौत की आहट सुनाई दे रही है
क्यूँ मोहब्बत सी दिखाई दे रही है

वो जिसे मैंने था रोका मोड़ पर यूँ
शक्ल मेरी सी दिखाई दे रही है

साहिलों ने हँस के बोला ये तलातुम
दर्द को मेरे रिहाई दे रही है

इस तरह रुख़्सार पर चंदन घिसे हैं
चीख़ रूहों की सुनाई दे रही है

रौशनी के उन फ़रिश्तों की कहानी
तीरगी जिनको दिखाई दे रही है

बाप ने जिन पे जवानी ख़र्च कर दी
वो ही औलादें रुलाई दे रही है

ये सफ़ेदी सर पे मेरे ताज सी है
उम्र ढलती अब दिखाई दे रही है

तन उधेड़ी खाल की ढोलक बना था
उनकी शादी में सुनाई दे रही है

Safeer Ray

सवाल-ए-इश्क़ में ख़ुद को भुला रहा हूँ मैं
तुम्हारे दर्द को अपना बना गया हूँ मैं

तुम्हारी राह में सब कुछ लुटा चुका लेकिन
अब अपने हौसले को आज़मा रहा हूँ मैं

कभी जो ख़्वाब थे आँखों से मिट गए ऐसे
के जैसे रेत पे तस्वीर खींचता हूँ मैं

हज़ार तीर हैं सीने में आरज़ू बनकर
फिर एक तीर तुम्हारा भी चाहता हूँ मैं

तुम्हारी चाह में सब कुछ गँवा चुका हूँ मगर
तुम्हारी बात पे फिर भी ठहर गया हूँ मैं

'सफ़ीर' नाम मेरा है मगर कहानी ये
कि ख़ुद ही ख़ुद को भी फिर अब भुला रहा हूँ मैं

Safeer Ray

ज़मीं ने फिर से तेरे ख़्वाब को जगाया है
सबा ने ग़ुंचों से हर राज़ को छुपाया है

यक़ीं में डूबे हैं दिल के तमाम अफ़साने
गुमाँ ने फिर भी तसव्वुर को क्या सुनाया है

शबों के लम्हे जो ज़हराब-ए-फ़िक्र बन बैठे
सितम को अश्क ने सीने में यूँ बसाया है

रहे रक़ीब तो माज़ी को भूलना चाहा
नज़र ने याद का एक-एक क़र्ज़ खाया है

गुलों का दर्द तो शायद हवा समझ लेती
मगर हिसाब वफ़ा आँख ने निभाया है

शबाब-ए-ज़िन्दगी मौजा-ए-ख़ार बन निकली
जिसे न देखना था वक़्त ने दिखाया है

रियाज़-ए-दिल का सुकूँ ग़म-ज़दा ही पाया है
तुझे भुलाने में हर तर्ज़ आज़माया है

वो आरज़ू में तेरी इक गली का शाइर था
सवाल तेरी वफ़ा ने उसे बनाया है

Safeer Ray

रगड़ रगड़ के जो एड़ियों को अक़ीदे चक्कर लगा रहे हो
अजीब दुंबे हो ख़्वाह मख़ाह में बुला रही क्यों ही जा रहे हो

मज़ाक़ जानिब तुम्हारे करके वो हर सखी को बता रही है
ये देखो जाहिल गॅंवार आशिक़ है अपनी तफ़री करा रहे हो

ज़रा सी ग़ैरत की फाॅंक फाॅंको अमाॅं मियाॅं तुम ये बात समझो
बनो हो सैयाँ छबीले जानी यूँ अपने कुनबे सता रहे हो

रक़ीब हम को बता के तुमने बड़ी फ़ज़ीहत उड़ाई बेटा
न जाने कितनों का शोना बाबू जिसे तुम अपना बता रहे हो

हमारी मानो ये काम कर लो कि लेखपाली प्रपत्र भर लो
बनाओ ताज़ीर अपनी ज़ाहिद यूँ अपने सजदे गिना रहे हो

नसीब का ये हिसाब देखो ज़बाॅं से आगे ख़िलाफ़ निकले
जो चाँद चुम्बन में ढूँढते थे उसी को राहें दिखा रहे हो

बहार आई थी बाग़ में जब तो तुमने काँटे चुने थे जानिब
जो फूल मुरझा के गिर चुका है उसी को मज़हब बना रहे हो

ये इश्क़ दुनिया ये नामुरादी हमारी बातों पे ग़ौर कर लो
बचाओ रूहों का ताज तर्ज़ा ये फ़र्ज़ अपने भुला रहे हो

Safeer Ray

दुश्मनी से वो हमें फिर यूँ सज़ा देने लगे
दोस्त बनकर वो हमें ज़ख्म-ए-वफ़ा देने लगे

इश्क़ करने का सिला कुछ इस तरह हमको मिला
लोग क़ातिल बनके फिर दिल की दवा देने लगे

जुर्म हमसे ये हुआ जो सच था उसको सच कहा
अब अदावत में हमें अपने सज़ा देने लगे

मेरे ज़ेर-ओ-बम पे जो बनते थे रश्क-ए-हूर वो
वो ही देखो अब हमें ज़हर-ए-वबा देने लगे

शहर के चौराहे पर चुपचाप बस हम थे खड़े
और जो मासूम थे सब बद-दुआ देने लगे

हर घड़ी झूठे बयानों के चले जो सिलसिले
जो वफ़ा के ख़ान-ए-ख़ानाँ वो खता देने लगे

सरपरस्ती में था जिनके घर मेरा ये फूस का
वो ही आँधी बनके शोलों को हवा देने लगे

मेरे इश्क़-ए-नूर के जो थे मज़म्मत दार सब
मेरी हालत देख कर वो भी दुआ देने लगे

Safeer Ray

रात घर याद तुम मैं और बस
दिन दुआ दर्द सब हैं और बस

मेज़ तस्वीर फ़न ग़ज़ल पर
चैन रोना दुखी नैं और बस

दूर जाना यूँ जान के फिर
झूठ होना तिरा बैं और बस

आँख आँसू लहू ये बिस्तर
चाह चाहत सभी वैं और बस

मय सिफाले 'सफ़ीर' साक़ी
हम यूँ बर्बाद से हैं और बस

Safeer Ray