@MohitSubran
Mohit Subran shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mohit Subran's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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आँखों के कोनों से फिसली और पलकों से छूट गई
नींद भी इक धागे जैसी है टूट गई तो टूट गई
करवट-करवट बढ़ते-बढ़ते
नींद की सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते
थक कर आख़िर सो जाता हूँ
मैं बिस्तर से लड़ते-लड़ते
जिसे मैं जानता हूँ पहले से उस से नहीं जुड़ना
नए रस्ते का तालिब हूँ पुराने पे नहीं मुड़ना
ज़ीस्त हमारी रौशन कर के इस दुनिया से जाने वाले
भूल भले जाएँ हम ख़ुद को लेकिन तुझको याद रखेंगे
दुआ करता हूँ मैं ही माँग सिंदूरी रहे तेरी
मुझी से और तिरा सिंदूर ये देखा नहीं जाता
किसी दिन तो हमें था टूटना देखो गए हम टूट
बिखरना रह गया है अब बिखर भी जाएँगे इक दिन
यक़ीं ईमाँ वफ़ादारी की बातें तू न कर मुझ से
तिरी ही वज्ह से खाए हैं जितने धोके खाए हैं
साथ में रह कर तिरे क्या ख़ूब गुज़रा वक़्त दोस्त
याद जब भी करता हूँ सब ज़ख़्म खुल खुल जाते हैं