Mohit Subran

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@MohitSubran

Mohit Subran shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mohit Subran's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

तुम्हें तो यार मयस्सर है बस ख़ुशी ही ख़ुशी
तुम्हारा क्या जिसे चाहो उसे उदास करो

Mohit Subran

जिरह जब-जब हुई इतिहास को लेकर
बदल तब-तब गया भूगोल दुनिया का

Mohit Subran

जो ख़ाली पेट हैं उनकी मुराद है रोटी
वो जिनके पेट भरे हैं जहान चाहते हैं

Mohit Subran

आँखों के कोनों से फिसली और पलकों से छूट गई
नींद भी इक धागे जैसी है टूट गई तो टूट गई

Mohit Subran

साँस मेरे सीने से इक-इक उखड़ जाएगी तब भी
देखना दिल में मचलती एक बेचैनी मिलेगी

Mohit Subran

करवट-करवट बढ़ते-बढ़ते
नींद की सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते

थक कर आख़िर सो जाता हूँ
मैं बिस्तर से लड़ते-लड़ते

Mohit Subran

साँस लेती है रौशनी ज्यूँ ही
तीरगी थरथराने लगती है

Mohit Subran

ये जो अवाम है इस को तू ना-तवाँ न समझ
इसी अवाम ने इक सल्तनत ढहा डाली

Mohit Subran

जिसे मैं जानता हूँ पहले से उस से नहीं जुड़ना
नए रस्ते का तालिब हूँ पुराने पे नहीं मुड़ना

Mohit Subran

यक-ब-यक उट्ठा ज़ेहन से पर्दा
और सब कुछ दिखाई देने लगा

Mohit Subran

जब कि तय है कि सब फिसलना है
फिर भला क्यों ये जोड़-जाड़ करूँ

Mohit Subran

ज़ीस्त हमारी रौशन कर के इस दुनिया से जाने वाले
भूल भले जाएँ हम ख़ुद को लेकिन तुझको याद रखेंगे

Mohit Subran

ये बात भूलें न नेता कि आम लोगों ने
जभी है चाही जो सरकार वो गिरा डाली

Mohit Subran

लगा लो अपने कलेजे से तुम इन्हें मोहित
ये लोग फिर न तुम्हें दस्तियाब हों शायद

Mohit Subran

कोख से जन्मे हम अँधेरों की
सो हमें रौशनी लुभाती है

Mohit Subran

दुआ करता हूँ मैं ही माँग सिंदूरी रहे तेरी
मुझी से और तिरा सिंदूर ये देखा नहीं जाता

Mohit Subran

तमाम ज़िन्दगी ये बात मैं न भूलूँगा
किसी ने याद न रक्खा ये याद रक्खूँगा

Mohit Subran

किसी दिन तो हमें था टूटना देखो गए हम टूट
बिखरना रह गया है अब बिखर भी जाएँगे इक दिन

Mohit Subran

यक़ीं ईमाँ वफ़ादारी की बातें तू न कर मुझ से
तिरी ही वज्ह से खाए हैं जितने धोके खाए हैं

Mohit Subran

साथ में रह कर तिरे क्या ख़ूब गुज़रा वक़्त दोस्त
याद जब भी करता हूँ सब ज़ख़्म खुल खुल जाते हैं

Mohit Subran

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