हिन्दी
0
हिन्दी
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Leaderboard
Login
0
Home
Explore
Submit
Library
Profile
Top 20
Kitaaben Shayari
वो लफ़्ज़ अब भी नक़्श हैं ज़ेहन ओ गुमान में
तुम ने कभी कहा था मेरी ज़िन्दगी हो तुम
Shakir Dehlvi
20
Gift
Download Image
2 Likes
तुम ने किस कैफ़ियत में मुख़ातब किया
कैफ़ देता रहा लफ़्ज़-ए-'तू' देर तक
Ambreen Haseeb Ambar
19
Gift
Download Image
23 Likes
ये शा'इरी ये शाइ'र इस ग़ज़ल को प्रणाम
अदब सीखने वाली हर क़लम को प्रणाम
Aryan Goswami
18
Gift
Download Image
3 Likes
मुझे उस की हर अदाकारी, याद है
रूठना-मनाना हर किस्सा-कहानी, याद है
तस्वीरें फ़ोन से हटा दी है मैं ने मगर
उस का नंबर आज भी मुँह जबानी, याद है
Read Full
Yashvardhan Jain
17
Gift
Download Image
2 Likes
बात कर के देखिए तो बात क्यूँ करते नहीं
लब भले जल जाएँ हम लफ्ज़ से फिरते नहीं
दोस्ती में दुश्मनी हो दुश्मनी में दोस्ती
जब निभाना हो मुरव्वत हम कहीं करते नहीं
Read Full
Ali Mohammed Shaikh
16
Gift
Download Image
2 Likes
उठानी पड़ रही हैं ईंट हम को
किताबें बोझ लगती थी हमेशा
Shekhar kumar
15
Gift
Download Image
3 Likes
कमाल-ए-फ़न है तुम्हारा कि मो'जिज़: है कोई
हर एक लफ़्ज़ से लगता है रो रहा है कोई
Ramnath Shodharthi
14
Gift
Download Image
1 Like
यही तो ज़िंदगी की ख़ूबसूरती है मियाँ
किसी को इल्म नहीं कल यहाँ पे क्या होगा
Ramnath Shodharthi
13
Gift
Download Image
1 Like
अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है
दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है
Jaani Lakhnavi
12
Gift
Download Image
26 Likes
आड़ ले कर नए दौर के इल्म की
फ़ोन ने चिट्ठियों का गला घोंटा है
Intzar Akhtar
11
Gift
Download Image
18 Likes
लगता है इल्म नहीं हैं उन को मेरी चाहत का अब
ख़त लिखना ही होगा मुझ को इश्क़ जताने के ख़ातिर
Devansh gupta
10
Gift
Download Image
4 Likes
अच्छी तरह से है मुझे दुनिया का इल्म, सो
क्या काम है जो आप यूँ अपना बना रहे
Prashant Sitapuri
9
Gift
Download Image
1 Like
शहीदों ने लिखी ये दास्तान-ए-खूँ मुबारक हो
मैं हिंदुस्तान हूँ हर दिल में ज़िंदा हूँ मुबारक हो
Ajeetendra Aazi Tamaam
8
Gift
Download Image
4 Likes
दिल पे कुछ और गुज़रती है मगर क्या कीजे
लफ़्ज़ कुछ और ही इज़हार किए जाते हैं
Jaleel 'Aali'
7
Gift
Download Image
24 Likes
ये नदी वर्ना तो कब की पार थी
मेरे रस्ते में अना दीवार थी
आप को क्या इल्म है इस बात का
ज़िंदगी मुश्किल नहीं दुश्वार थी
थीं कमानें दुश्मनों के हाथ में
और मेरे हाथ में तलवार थी
जल गए इक रोज़ सूरज से चराग़
रौशनी को रौशनी दरकार थी
आज दुनिया के लबों पर मुहर है
कल तलक हाँ साहब-ए-गुफ़्तार थी
Read Full
ARahman Ansari
6
Gift
Download Image
13 Likes
और बढ़ जाती है कुछ लफ़्ज़-ओ-बयाँ की तासीर
लफ़्ज़ जब अश्क की सूरत में अदा होता है
Rais Amrohvi
5
Gift
Download Image
8 Likes
अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें
हो गया है ज़िंदगी का तजरबा थोड़ा बहुत
Manzar Bhopali
4
Gift
Download Image
17 Likes
तुझ को क्या इल्म तुझे हारने वाले कुछ लोग
किस क़दर सख़्त नदामत से तुझे देखते हैं
Parveen Shakir
3
Gift
Download Image
21 Likes
किसी को बोझ लगती हैं किताबें भी
किसी ने घर उठा रक्खा है कंधे पर
Sarika saransh
2
Gift
Download Image
3 Likes
टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुए
फिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं
Unknown
1
Gift
Download Image
15 Likes
Ilm Shayari
Zindagi Shayari Collection
Khamoshi Shayari
Kahani Shayari
Ehsaas Shayari