Zehra Nigaah

Zehra Nigaah

@zehra-nigaah

Zehra Nigaah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zehra Nigaah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

ख़ताएँ दोनों की यकसाँ थी पर त'अज्जुब है
किसी को दाद मिली और किसी को रुसवाई

Zehra Nigaah
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल
अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए

Zehra Nigaah
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नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं
तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए

Zehra Nigaah
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हर फ़िक्र की अपनी मंज़िल थी
हर सोच का अपना रस्ता था

Zehra Nigaah
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एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की
दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की

Zehra Nigaah
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अब भी कुछ लोग सुनाते हैं सुनाए हुए शेर
बातें अब भी तिरी ज़ेहनों में बसी लगती हैं

Zehra Nigaah
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अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है
कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है

Zehra Nigaah
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छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था
पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्ही से सीखा

Zehra Nigaah
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इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं
आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं

Zehra Nigaah
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