@thekh963744
Aakash Giri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aakash Giri's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मैं रोक तो रहा था उसे पर चली गई
ग़ुस्से में ज़िन्दगी थी सो उठ कर चली गई
करता रहा मना मैं उसे जितना हो सका
पर सीधा मेरे दिल के वो अंदर चली गई
उम्र भर मेरी उदासी के लिए काफ़ी है
जो सबब मेरी ख़मोशी के लिए काफ़ी है
जान दे देंगे अगर आप कहेंगे हमसे
जान देना ही मुआफ़ी के लिए काफ़ी है
तुम बचाकर भी मुझे छोड़ोगे तन्हा इसलिए
मै हूँ जिस भी हाल में मुझको उसी में छोड़ दो
तेरे बस में जो भी कुछ है वो सभी बर्बाद कर
मैंने जैसे की है वैसे ज़िंदगी बर्बाद कर
इस घड़ी दो काम कर सकता है तू हर हाल में
चूमना है चूम ले! या तीरगी बर्बाद कर
मैं ग़ज़ल कहता हूँ जिसके काफ़िया हैं राम जी
शायरी में इक नया सा ज़ाविया हैं राम जी
लड़ रही अंदर ही अंदर युध्द जग के रीत से
जो कभी हारी नहीं थी वो सिया हैं राम जी