काश ऐसा संयोग हो जाए
दूर सारे वियोग हो जाए
प्यार में हूं, मरीज़ बन बैठा
आपको भी ये रोग हो जाए
दिखनें में है, सीधी लड़की
लेकिन है वो, ज़िद्दी लड़की
मुझ को हरदम, तड़पाती है
अपनी माँ की बिगड़ी लड़की
उस पर लिखता ग़ज़लें प्यारी
सब कुछ है वो पगली लड़की
हम को छोड़ा घर की ख़ातिर
या'नी है वो, असली लड़की
वा'दा था इक संग जीने का
'मज़बूरी' में, बदली लड़की
मेरे हिस्से ही तो ग़म हो रहा है
यूं बे - ईमान मौसम हो रहा है
यहां हम मौत के दर पर खड़े हैं
वहां डोली का आलम हो रहा है
उधर रस्में निभाई जा रही हैं
इधर मेरा ही मातम हो रहा है
मेरी सुन रूह तू आज़ाद हो जा
किसी दूजे का जानम हो रहा है
हमारी आज, बिछड़न की घड़ी है
तुम्हारा आज संगम हो रहा है