Prem Warbartani

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@prem-warbartani

Prem Warbartani shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Prem Warbartani's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal

कभी तो खुल के बरस अब्र-ए-मेहरबाँ की तरह
मेरा वजूद है जलते हुए मकाँ की तरह

भरी बहार का सीना है ज़ख़्म ज़ख़्म मगर
सबा ने गाई है लोरी शफ़ीक़ माँ की तरह

वो कौन था जो बरहना बदन चटानों से
लिपट गया था कभी बहर-ए-बे-कराँ की तरह

सुकूत-ए-दिल तो जज़ीरा है बर्फ़ का लेकिन
तेरा ख़ुलूस है सूरज के साएबाँ की तरह

मैं एक ख़्वाब सही आप की अमानत हूँ
मुझे सँभाल के रखिएगा जिस्म-ओ-जाँ की तरह

कभी तो सोच कि वो शख़्स किस क़दर था बुलंद
जो बिछ गया तेरे क़दमों में आसमाँ की तरह

बुला रहा है मुझे फिर किसी बदन का बसंत
गुज़र न जाए ये रुत भी कभी ख़िज़ाँ की तरह

Prem Warbartani