Kushal "PARINDA"

Kushal "PARINDA"

@kushalshayarjk08

KUSHAL "PARINDA" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in KUSHAL "PARINDA"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

एक बक्से में पैक होकर भी
लौटने की क़सम निभाते हैं

Kushal "PARINDA"

आप सब घूम फिर सकें सुख से
इसलिए फौजी घर नहीं जाते

Kushal "PARINDA"

मुझे तो ये ज़माना मानता है
मगर तू बस ठिकाना मानता है

जकड़ ले गर हमें पहलू मे कोई
तो ये समझो ख़ज़ाना मानता है

Kushal "PARINDA"

जकड़ ले गर हमें पहलू में कोई
तो ये समझो, ख़ज़ाना मानता है

Kushal "PARINDA"

मुझे तो ये ज़माना, मानता है
मगर तू बस ठिकाना मानता है

Kushal "PARINDA"

बिना तेरे ज़माने में गुज़ारा आम लगता है
मेरी हर कामयाबी में तेरा ही नाम लगता है

Kushal "PARINDA"

अगर अच्छा भी हो कोई मुझे अच्छा नहीं लगता
ज़माने का सताया हूँ कोई सच्चा नहीं लगता

Kushal "PARINDA"

बड़े बूढ़ों ने जब पूछा नगर कैसे जवाँ है ये
कहा हमने लुटाकर गाँव जो डटकर खड़े हैं हम

Kushal "PARINDA"

कहीं पर दूर दरिया के किनारों पर खड़े हैं हम
तेरे दिल से निकाले दर-बदर होकर खड़े हैं हम

मुझे तुमसे मोहब्बत है इधर देखो ना तुम जाना
तुझे पाने की ख़ातिर हर जगह मिटकर खड़े हैं हम

Kushal "PARINDA"

मुझे तुमसे मोहब्बत है इधर देखो न तुम जाना
तुझे पाने कि ख़ातिर हर जगह मिटकर खड़े हैं हम

Kushal "PARINDA"

कहीं पर दूर दरिया के किनारों पर खड़े हैं हम
तेरे दिल से निकाले, दर-बदर होकर खड़े हैं हम

Kushal "PARINDA"

मेरे हिस्से नहीं आती अगर मैं जान जाता तो
मोहब्बत जान लेवा है अगर मैं मान जाता तो

Kushal "PARINDA"

अगर देखा हुआ होता किसी से, इश्क़ काग़ज़ पर
तो हम ने भी किया होता किसी से, इश्क़ काग़ज़ पर

Kushal "PARINDA"

पुरानी हो चुकी बेशक किताबें इश्क़ की मेरी
मगर यादों के पन्ने आज भी महफूज़ रक्खे हैं

Kushal "PARINDA"

नहीं मरते जो तानों से वो हम आज़ाद पंछी हैं
गुज़ारी उम्र जिस वन में उसे आबाद रखते हैं

Kushal "PARINDA"

भुला देना ही बेहतर है ग़लत बातों को जीवन में
बड़े बेचैन रहते हैं जो सब कुछ याद रखते हैं

नहीं मरते जो तानों से वो हम आज़ाद पंछी हैं
गुज़ारी उमर जिस वन में उसे आबाद रखते हैं

Kushal "PARINDA"

भुला देना ही बेहतर है ग़लत बातों को जीवन में
बड़े बेचैन रहते हैं जो सब कुछ याद रखते हैं

Kushal "PARINDA"

कभी ख़ामोश रहकर भी तमाशा देख लेता हूँ
सुकूँ में हूँ, ज़माने की हताशा देख लेता हूँ

Kushal "PARINDA"

मेरी बस शर्त इतनी है तेरे हाथों से पट्टी हो
तो फिर चाहे ज़माने का कोई भी ज़ख़्म मिल जाए

Kushal "PARINDA"

ये कैसे लोग जो तुमको सहीं रस्ता दिखाते हैं
कहीं कहते तुझे अपना कहीं दुश्मन बताते हैं

ये कैसा शामियाना ओढ़ कर बैठे जहाँ में सब
यहाँ सब बोलते है झूठ पर सच को छुपाते हैं

Kushal "PARINDA"

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