@komal-joya
Komal Joya shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Komal Joya's shayari and don't forget to save your favorite ones.
Followers
1
Content
2
Likes
3
ये जंग हार न जाए सिपाह क़ैद में है
ग़ुलाम तख़्त पे क़ाबिज़ हैं शाह क़ैद में है
परिंदे इस लिए ज़िंदाँ के गिर्द घूमते हैं
कि उन की डाल का इक बे-गुनाह क़ैद में है
तेरे हुक़ूक़ की कोई नहीं ज़मानत अब
ग़रीब-ए-शहर तेरा ख़ैर-ख़्वाह क़ैद में है
सुख़न की हम को इजाज़त न हुक्म देखने का
क़लम असीर-ए-सलासिल निगाह क़ैद में है
सवाल कौन उठाएगा मुंसिफ़ों पे हुज़ूर
बरी हुए सभी मुजरिम गवाह क़ैद में है
ये ‘अर्श-ओ-फ़र्श को इक दिन हिलाएगी 'कोमल'
दरून-ए-दिल जो मेरी सर्द आह क़ैद में है
मंसूब चराग़ों से तरफ़-दार हवा के
तुम लोग मुनाफ़िक़ हो मुनाफ़िक़ भी बला के
क्यों ज़ब्त की बुनियाद हिलाने पे तुला है
मैं फेंक न दूँ हिज्र तुझे आग लगा के
इक ज़ूद-फ़रामोश की बे-फ़ैज़ मोहब्बत
जाऊँगी गुज़रते हुए रावी में बहा के
इस वक़्त मुझे 'उम्र-ए-रवाँ दर्द बहुत है
तुझ से मैं निमटती हूँ ज़रा देर में आ के
मैं अपने ख़द-ओ-ख़ाल ही पहचान न पाई
गुज़रा है यहाँ वक़्त बड़ी धूल उड़ा के
करती हूँ तर-ओ-ताज़ा हरी रुत के मनाज़िर
काग़ज़ पे कभी पेड़ कभी फूल बना के