@khalil-ur-rehman-qamar
Khalil Ur Rehman Qamar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Khalil Ur Rehman Qamar's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तूने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा
तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
अपनी आँखों में 'क़मर' झाँक के कैसे देखूँ
मुझ से देखे हुए मंज़र नहीं देखे जाते
एक चेहरे से उतरती हैं नक़ाबें कितनी
लोग कितने हमें इक शख़्स में मिल जाते हैं
वक़्त बदलेगा तो इस बार मैं पूछूँगा उसे
तुम बदलते हो तो क्यूँ लोग बदल जाते हैं
तेरे दिल के निकाले हम कहाँ भटके कहाँ पहुँचे
मगर भटके तो याद आया भटकना भी ज़रूरी था
मैं समझा था तुम हो तो क्या और माँगू
मेरी ज़िन्दगी में मेरी आस तुम हो
ये दुनिया नहीं है मेरे पास तो क्या
मेरा ये भरम था मेरे पास तुम हो
कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं
तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
ख़्वाब पलकों की हथेली पे चुने रहते हैं
कौन जाने वो कभी नींद चुराने आए
मुझ पे उतरे मेरे अल्हाम की बारिश बन कर
मुझ को इक बूॅंद समंदर में छुपाने आए
तुम भी वैसे थे मगर तुम को ख़ुदा रहने दिया
इस तरह तुम को ज़माने से जुदा रहने दिया
मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले
उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए
ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया
आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ
उसके ग़म तक आ पहुँचा हूँ
पहली बार मुहब्बत की थी
आख़री दम तक आ पहुँचा हूँ