@junesahab
'Joon' Sahab shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in 'Joon' Sahab's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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वो सब मिरे रक़ीब हैं जो हैं तिरे क़रीब
कैसे वफ़ा करूँ मैं बता मेरे हम-नफ़स
लगी है मुख़्तसर तख़्ती दर-ओ-दीवार पर घर के
लिखूँ अब क्या भला उस में मिरी लम्बी कहानी है
फिर इक जगह पे उस से मिरा राब्ता हुआ
फिर लौट कर न गुज़रा कभी याँ वहाँ से मैं
सारी बातें अपनी जगह हैं लेकिन मैं इक बात कहूँ
तुम आँखों से ओझल होते ही ख़्वाबों में आ जाती हो
सिखा रहे हैं वो भी मुझ को अब वफ़ादारी
जो अपने दिल को सभी से लगाए बैठे हैं