@divya.behindthelense
divya 'sabaa' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in divya 'sabaa''s shayari and don't forget to save your favorite ones.
Followers
33
Content
82
Likes
248
राह में हर पल भटक जाने का डर बाक़ी रहे
यानी मंजिल पर पहुँच कर भी सफ़र बाक़ी रहे
ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है
कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है
उदासी के घने साये मिटाकर ही वो मानेंगे
जो तन्हा अपने कमरे में ठहाकों को लगाते हैं
आँखें तरस रही हैं जज़्बे पिघल रहे हैं
अनफ़ास को हमारे लम्हे निगल रहे हैं
जज़्बात के शजर पर बरसात है ग़मों की
एहसास के सफ़र में हम रुख़ बदल रहे हैं
अगर मासूमियत से काम लेना चाहते हो
पढ़ो छू कर गुलों को तुम कि उन पर क्या लिखा है
आशिक़ों का यही अफ़साना है और कुछ भी नहीं
कुछ न कर पाएँ तो वो आह-ओ-फ़ुग़ाँ तक पहुँचे
ज़मीं का सिलसिला सिर्फ़ आसमाँ तक है
उदासी क्या कहा जाए कहाँ तक है
यहाँ से ले के अन्दाज़न वहाँ तक है
अकेलापन मकाँ से ला-मकाँ तक है