Shadab khan

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@Shadabkhan

Shadab khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shadab khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

कौन देता ग़रीब को इज्ज़त
तू अमीरों को ही बधाई दे

Shadab khan

मैंने चाहा है तुमको और चाहूँगा
न देखो इस तरह मैं छूट जाऊँगा

Shadab khan

ये और बात है तू खाता रहा क़सम
अफ़सोस अब भरोसा लेकिन नहीं रहा

Shadab khan

अजाइब ही अपनी भी किस्मत रही है
वही देखने की तो हसरत रही है

करो ज़िद न पाने की शादाब उस को
उधर बे-वफ़ाई ही फितरत रही है

Shadab khan

मेरा मक़सद उसे गले लगाना है
ये मिलना ईद का तो बस बहाना है

Shadab khan

मेरे हो जाने से ख़फ़ा कुछ भी नहीं
उस पर असर कोई हुआ कुछ भी नहीं

जिसके सभी हो चाहने वाले रुकें
उसके लिए उलफ़त भला कुछ भी नहीं

Shadab khan

इतनी रोटियाँ खाता नहीं हूँ मैं अब
जितना याद भी ख़ूँ माँगती है ये अब

Shadab khan

ये और बात है कोई गिन नहीं रहा है
ये वक़्त ख़ास जो तेरे बिन नहीं रहा है

Shadab khan

जिसके साथ थोड़ा भी लगाव किया
उसके होंठ पर गहरा सा घाव किया

Shadab khan

हल्के हल्के ही से तेरा जुनून निकलेगा
फिर भी आई याद अब आँखों से ख़ून निकलेगा

Shadab khan

सुना था हिज़्र मे होता है ऐसा
मेरे भी अब जगारे हो रहे हैं

Shadab khan

छू ले गर वो मैं ठीक हो जाऊँ
जाने क्यों हफ्तों तक दवाई दे

Shadab khan
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मुनफ़रिद ख़ुशबू है इस शजर की
ऐसा लगता है उसने छुआ हो

Shadab khan

छोड़ कर कब का वो जा चुका है
लगता है कल का ही हादसा हो

Shadab khan

अजब दुख है वो रोता है ख़्वाबों में
अजब दर्द है रोज़ बढ़ जाता है

Shadab khan

मैं इनकार कर तो दूंँ उसकी मुहब्बत
मगर यार वो रोता भी तो बहुत है

Shadab khan

न ज़मीनों में न कमीनों में न हसीनों में
मेरी ज़िंदगी तो गुज़र रही है मशीनों में

Shadab khan

हर पल उसके साथ बिताना चाहता हूँ
उसको मैं हर बात बताना चाहता हूँ

Shadab khan

इक आदमी जो घर पे कभी हँसता ही नहीं
पकड़ा गया है हँसता हुआ कैमरे के साथ

Shadab khan

दिल उसको देके ये इल्म हुआ हमको
मिलती है कैसे मरने की वजह हमको

Shadab khan

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