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तेरी गलियों से कुछ इस तरह गुज़र जाऊँगा
जो नज़र आऊँ न तुझ को तो किधर जाऊँगा
जो नज़र आऊँ न तुझ को तो किधर जाऊँगा
पहले उतरूँगा तेरे चश्म के काशाने में
फिर तेरी नज़रों से यकलख़्त उतर जाऊँगा
तेरी रुख़्सत से भला और तो क्या ही होगा
मैं तो बिखरा था अबस और बिखर जाऊँगा
और तड़पूँगा जलाने से ये भी मुमकिन है
पर मैं लोहा हूँ जो जलने से निखर जाऊँगा
ऐन मुमकिन है कि फिर इश्क़ के इस दरिया में
तैर सकता हूँ मैं जो डूब अगर जाऊँगा
नाम बदनाम हो चाहे मिले मुझ को शोहरत
काम कुछ ऐसा गज़ल-गोई में कर जाऊँगा
तोड़ दूँगा मैं सभी नफ़रतों की दीवारें
मैं मुहब्बत ही मुहब्बत यहाँ भर जाऊँगा
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