तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैं
उसके ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैं
ये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरह
हर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं
तमाम हैं बिमारियाँ मगर तुम्हें हुआ है इश्क़
तो अब तुम्हें ज़रूरत-ए-दुआ ही है दवा नहीं
इश्क़ मोहब्बत प्यार वगेहरा ये जो दिल की बातें हैं
सच पूछो तो सहरा में दरिया मिलने सी बातें हैं
मैं उसको ये समझाते थक जाता हूँ की जान सुनो
ख़त लिखना और फूल भेजना कहने वाली बातें हैं
ब-मंज़िल पर हूँ मगर ये मकां मंज़िल नहीं लगता
सफ़र को भी मिरा अब कोई मुस्तक़बिल नहीं लगता
तुमसे मिले बिना भी तुमको याद किया जा सकता है
इश्क़ में ख़ुदको इस तरहा बर्बाद किया जा सकता है
दिल में छुपी हज़ारों बातें तुमसे बोली जा सकतीं हैं
कैद सभी, जज़्बातों को आज़ाद किया जा सकता है
इश्क़ अगर न हो मुझसे तो, छोड़ के जा सकते हो तुम
या इस से बेहतर हल भी ईजाद किया जा सकता है
कुछ कहा और कुछ अनकहा रह गया
दिल युँही ख़्वाहिशों से भरा रह गया
उसने जाते हुए ये भी सोचा नहीं
उसके जाने पे, बाक़ी ही क्या रह गया
उम्र भर साथ देना था मेरा जिसे
वो गया और मैं देखता रह गया
दश्त में जिसको दरिया समझते हो तुम
पास उसके है जो भी गया, रह गया
इश्क़ से और उम्मीद होती भी क्या
इश्क़ में जो फ़ना था फ़ना रह गया