Armaan khan

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    यार सिगरेट जलाओ के बहुत दर्द है आज
    सर्द सी रात है बारिश है हवा चल रही है

    कोई पूछे कि ये सब क्या है तो कह देना उसे
    बच तो निकले हैं मोहब्बत से दवा चल रही है

    Armaan khan
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    तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं
    एक वीरान सा मकाँ और मैं

    दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो
    एक सिगरेट का धुआँ और मैं

    Armaan khan
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    हाँ यही मेरी ख़ुद-शनासी है
    जिस्म ताज़ा है रूह बासी है

    सब हँसी को हँसी समझते हैं
    तुम तो समझो हँसी उदासी है

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    आपसे राबता था पहले कोई
    ओह, हाँ, याद आया, कैसे हो

    Armaan khan
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    हर एक चीज़ वहीं है जहाँ पे छोड़ी थी
    बस एक घर ही नहीं आ रहा नज़र घर में

    Armaan khan
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    हुई है यार ख़ुदा तुझसे जबसे बात मेरी
    कई दिनों से बड़ी मुतमइन है ज़ात मेरी

    Armaan khan
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    हर इंसान के अंदर इतनी ख़्वाहिश हो
    धूप ज़ियादा हो जाए तो बारिश हो

    किसी बहाने याद रखे वो शख़्स मुझे
    इश्क़ अगर नामुमकिन है तो रंजिश हो

    Armaan khan
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    यार कश्ती है बहुत दूर, किनारा है कोई
    डूबने वाले को तिनके का सहारा है कोई

    अजनबियत के मकड़जाल में उलझे हुए हम
    ख़ुद से ही पूछ रहे हैं कि तुम्हारा है कोई

    Armaan khan
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    मौत का इंतिज़ार किसको है?
    नींद का है, मगर नहीं आती

    Armaan khan
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    इश्क़ का अपना भी मे'आर हुआ करता है
    और अब उससे मैं नीचे तो नहीं आऊँगा

    तुझे कुछ कहना है मुझसे तो यहीं पर कह दे
    मैं वो आशिक़ हूँ जो पीछे तो नहीं आऊँगा।

    Armaan khan
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