यार सिगरेट जलाओ के बहुत दर्द है आज
सर्द सी रात है बारिश है हवा चल रही है
कोई पूछे कि ये सब क्या है तो कह देना उसे
बच तो निकले हैं मोहब्बत से दवा चल रही है
तेरी क़िस्मत कहाँ-कहाँ, और मैं
एक वीरान सा मकाँ और मैं
दूर तक आ रहा नज़र कुछ तो
एक सिगरेट का धुआँ और मैं
हाँ यही मेरी ख़ुद-शनासी है
जिस्म ताज़ा है रूह बासी है
सब हँसी को हँसी समझते हैं
तुम तो समझो हँसी उदासी है
हर इंसान के अंदर इतनी ख़्वाहिश हो
धूप ज़ियादा हो जाए तो बारिश हो
किसी बहाने याद रखे वो शख़्स मुझे
इश्क़ अगर नामुमकिन है तो रंजिश हो
यार कश्ती है बहुत दूर, किनारा है कोई
डूबने वाले को तिनके का सहारा है कोई
अजनबियत के मकड़जाल में उलझे हुए हम
ख़ुद से ही पूछ रहे हैं कि तुम्हारा है कोई
इश्क़ का अपना भी मे'आर हुआ करता है
और अब उससे मैं नीचे तो नहीं आऊँगा
तुझे कुछ कहना है मुझसे तो यहीं पर कह दे
मैं वो आशिक़ हूँ जो पीछे तो नहीं आऊँगा।