तुम्हारी यादें हैं सो कैसे इनको भूल जाएँ हम
भला कोई हवा के बिन जिया है और जी सकता है
चलो ऐ हिंद के सैनिक कि लहराएँ तिरंगा हम
जिसे दुनिया नमन करती है उस पर्वत की चोटी पर
सभी हैरत करेंगे जब नई पहचान लिख देंगे
फ़लक पर भी हुनर से अपने हिंदुस्तान लिख देंगे
कसर उसने न छोड़ी कोई मेरा दिल दुखाने में
वो अपनी हद से नीचे गिर गया मुझको गिराने में
बिछड़ कर मुझसे तुझको क्या मिला है
कि जो कुछ था वो भी खोना पड़ा है
गया था जिस जगह पर छोड़ कर तू
उसी रस्ते पे दिल अब भी खड़ा है
मिले हैं ज़ख़्म इतने कि बता भी मैं नहीं सकता
किसी से बाद तेरे दिल लगा भी मैं नहीं सकता
गुल कि गुलशन को सुना है तुम चुराना चाहते हो
आज फिर मुझ को गले से तुम लगाना चाहते हो