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Dussehra Shayari
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना
एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है
Kumar Vishwas
SHER
दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
POST
चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस
लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस
Nomaan Shauque
SHER
राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था
दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था
Pratap Somvanshi
SHER
वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
Kaif Bhopali
SHER
लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी
सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे
Pratap Somvanshi
SHER
हम में जितने राम हैं सब बन-वास पे हैं
हम में जितने रावण हैं सब राजा हैं
Nomaan Shauque
SHER
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
SHER
जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
Jamuna Parsad Rahi
SHER
अच्छों से पता चलता है इंसाँ को बुरों का
रावन का पता चल न सका राम से पहले
Rizwan Banarasi
SHER
अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना
अब नाम किसी शख़्स का रावन न मिलेगा
Anwar Jalalpuri
SHER
है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है
Nazeer Akbarabadi
POST
गुज़िश्ता साल शायद ठीक से मारा नहीं था
ये रावण इस बरस फिर सामने तनकर खड़ा है
Bhaskar Shukla
SHER
हृदय में बसे हों अगर राम तेरे
बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे
Kavi Naman bharat
SHER
बड़ी शिद्दत से जो पुतला सजाया था
सभी मिल के उसे ही अब जलाएंगे
Alankrat Srivastava
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