जब रात की नागिन डसती है
नस नस में ज़हर उतरता है
नस नस में ज़हर उतरता है
जब चाँद की किरनें तेज़ी से
उस दिल को चीर के आती हैं
जब आँख के अंदर ही आँसू
सब जज़्बों पर छा जाते हो
तब याद बहुत तुम आते हो
जब दर्द की झानजर बजती है
जब रक़्स ग़मों का होता है
ख़्वाबों की ताल पे सारे दुख
वहशत के साज़ बजाते हैं
गाते हैं ख़्वाहिश की लय में
मस्ती में झूमते जाते हैं
सब जज़्बों पर छा जाते हो
तब याद बहुत तुम आते हो
Read Fullउस दिल को चीर के आती हैं
जब आँख के अंदर ही आँसू
सब जज़्बों पर छा जाते हो
तब याद बहुत तुम आते हो
जब दर्द की झानजर बजती है
जब रक़्स ग़मों का होता है
ख़्वाबों की ताल पे सारे दुख
वहशत के साज़ बजाते हैं
गाते हैं ख़्वाहिश की लय में
मस्ती में झूमते जाते हैं
सब जज़्बों पर छा जाते हो
तब याद बहुत तुम आते हो
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समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
तिरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
तिरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से
कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
तिरी यादों की ख़ुश्बू खिड़कियों में रक़्स करती है
तिरे ग़म में सुलगता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
न जाने हो गया हूँ इस क़दर हस्सास मैं कब से
किसी से बात करता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
मैं सारा दिन बहुत मसरूफ़ रहता हूँ मगर ज्यूँ ही
क़दम चौखट पे रखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
हर इक मुफ़्लिस के माथे पर अलम की दास्तानें हैं
कोई चेहरा भी पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
बड़े लोगों के ऊँचे बद-नुमा और सर्द महलों को
ग़रीब आँखों से तकता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
तिरे कूचे से अब मेरा तअ'ल्लुक़ वाजिबी सा है
मगर जब भी गुज़रता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
हज़ारों मौसमों की हुक्मरानी है मिरे दिल पर
'वसी' मैं जब भी हँसता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
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