मुँह में महँगा क़िवाम घुलता हो
    और फिर उस पे उर्दू लहजा भी

    Meem Maroof Ashraf
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    रास आने लगी है तन्हाई
    यानी अब हो रही है आदत सी

    Meem Maroof Ashraf
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    दूर जाना है अगर मुझ से तो जा सकते हो
    हाँ करो वादा कभी याद नहीं आओगे

    Meem Maroof Ashraf
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    ये काफ़ी है कि हम इक दूसरे पर मरते हैं 'अशरफ़'
    मोहब्बत साथ जीने का तक़ाज़ा तो नहीं करती

    Meem Maroof Ashraf
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    आख़िरी बार तुम से कहना है
    हम को बस तुम से ही मोहब्बत है

    Meem Maroof Ashraf
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    वही सब लोग 'अशरफ़' आस्तीं के साँप निकले हैं
    जिन्हें शामिल समझते थे तुम अपने ख़ैर-ख़्वाहों में

    Meem Maroof Ashraf
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    अब तो वो शख़्स मिरा कुछ भी नहीं लगता है
    पर ये लगता है मुझे कुछ तो मगर लगता है

    Meem Maroof Ashraf
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    देंगें ये अहले जुर्म को राहत
    बे कुसूरों को फाँसियाँ देंगें

    Meem Maroof Ashraf
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    नहीं करेगें तुझे याद एक मुद्दत तक
    करेगें याद तो फिर याद करते जाएँगे

    Meem Maroof Ashraf
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    इश्क़ नासूर बन गया है अब
    कुछ नहीं फ़ायदा दवा कर के

    Meem Maroof Ashraf
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