Monis faraz

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    फ़िक्र-ए-काबा न बुत परस्ती है
    मेरी अपनी ही मौज मस्ती है

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    देख कितना हसीन मंज़र है
    बाल खोले हुए वो छत पर है

    मैं ज़मीं की तरह हूँ गर्दिश में
    मिस्ल-ए-सूरज पिया तेरा घर है

    सिर्फ़ यादों के साथ जीते हैं
    वो हमें अब कहाँ मयस्सर है

    लोग ईमान लाए हैं जिस पर
    व्हाट्सएप नाम का पयम्बर है

    उसका दीदार हो नहीं पाया
    इस गली में ये चौथा चक्कर है

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    तुम्हारा हिज्र बड़े ही सुकून से गुज़रा
    भटकते रहना था और बस मलाल करना था

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    ये खास नज़ारा काफ़िर है
    आँखों का इशारा काफ़िर है

    कब पेंट हमारी वाज़िब है
    परफ्यूम हमारा काफ़िर है

    कब ठीक चलाना एफ बी का
    यू ट्यूब तो सारा काफ़िर है

    तस्वीर बनाना है आफत
    आधार बिचारा काफ़िर है

    ईसाईयों जैसा पहनावा
    लहजा भी हमारा काफ़िर है

    क्या ठीक नही मोटर गाड़ी
    क्या फ़ोन तुम्हरा काफ़िर है

    बस इनकी ही बातें सच्ची हैं
    न्यूटन का सिपारा काफ़िर है

    इक बात नही मोमिन जैसी
    मोनिस तू तो सारा काफ़िर है

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    कितनी हसीं है देख न ये रात रक़्स कर
    सब कुछ भुला के यार मेरे साथ रक़्स कर

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    रुख़ से पर्दा जो उठा रक्खा है तौबा तौबा
    तू ने हंगामा मचा रक्खा है तौबा तौबा

    एक तो आँखें तिरी यार हैं ख़ंजर जैसी
    उस पे काजल भी लगा रक्खा है तौबा तौबा

    शैख़ जी आप को आख़िर ये हुआ क्या है कहो
    जाम हाथों में उठा रक्खा है तौबा तौबा

    चंद पैसे के लिए आप ने क्यूँकर साहब
    अपना ईमान गँवा रक्खा है तौबा तौबा

    सीधे मुँह बात भी करते नहीं तुम तो हम से
    ग़ैर को पास बिठा रक्खा है तौबा तौबा

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    उसके कहने पे जलाई गई सारी बस्ती
    तेरा कहना है कि सुल्तान बड़ा अच्छा है

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    बात इतनी तो मेरी मान बड़ा अच्छा है
    तेरा लहजा ये मेरी जान बड़ा अच्छा है

    तेरे चेहरे के सिवा कोई न देखूँ चेहरा
    तेरी जानिब से ये फरमान बड़ा अच्छा है

    ऐसी बातों से हमें कोई सरोकार नहीं
    अच्छी गीता है कि कुरआन बड़ा अच्छा है

    उसके कहने पे जलाई गई सारी बस्ती
    तेरा कहना है कि सुल्तान बड़ा अच्छा है

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    ये मत पूछो हम ने कितना ज़ब्त किया
    तुम से बहतर तुमसे अच्छा ज़ब्त किया

    इक आँसू भी इन पालको पर आ न सका
    अब के मैंने अच्छा खासा ज़ब्त किया

    शायद कोई पूरी उम्र न कर पाए
    तेरे हिज्र में मैंने जितना ज़ब्त किया

    इस दर्द को सह लेना कुछ आसान न था
    यानी तुम ने बेहद उम्दा ज़ब्त किया

    मेरे जैसा कौन है मोनिस ये जिसने
    इतना उम्दा इतना आला ज़ब्त किया

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    एक जानिब तो तेरी ज़ुल्फ़ खुली जाती है
    दूसरी सिम्त मेरी अक़्ल उड़ी जाती है

    ऐसा लगता है मिरी जान निकल जाएगी
    रूठ कर मुझ से तू जिस वक्त चली जाती है

    रब ने मख़लूक़ बनाई थी जो सब से बेहतर
    हाय आपस मे वो लड़ लड़ के मरी जाती है

    आप ने झेला है लोगो का बहिष्कार फ़क़त
    सच के कहने पे तो गर्दन भी चली जाती है

    आप ज़िद्दी हैं मगर दिल के बहुत हैं अच्छे
    बात जो कहने की है वो तो कही जाती है

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