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देखा नहीं हमने किसी को साथ मेंहम चार इक घर में सलीके से रहे
दोस्त हो तुम मिरे बड़े भाईयाद यह बात तुम सदा रखना
ज़िंदगी दूर ही हमें कर देमौत के बाद वस्ल मुमकिन है
पता था मुझे तुम मना ही करोगीतभी मैं नहीं आ सका दोस्त भेजा
मर्ज़ मुझे क्या है मैं तो अच्छा हूँ जाँचारागर का पेशा है झूठे होना तो
और इक रोज़ हमने ये देखायार मुश्किल नहीं मेहनत करना
ग़र बुला लेती वो शादी के दिनतो चला जाता मैं भी वर बन कर
मुझे उसको कहाँ कोई ग़लत साबित बताना है लिहाज़ा तर्क उसके साथ करता ही नहीं मैं तो
चाँदनी रात है और राहत है चाँद तो साथ है और राहत है
ऐसा बदला हूँ तिरे शहर आकर अपने घर का तो पता भूल बैठा